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Showing posts from 2012

अखबार परिवार . विज्ञापन मैनेजर पुत्र और पत्रकार पुत्री .

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घर पर लंच टाइम में एक फोन आया, चौहान जी नमस्‍कार , सर दैनिक ................से बोल रहा हूं, सर कल एक ....................परिशिष्‍ट निकाल रहे थे, बास, कह रहे हैं आपका से छोटा सा विज्ञापन लगा लगाने को इसी जानकारी को देने के लिऐ फोन किया था, मैंने उसकी बात को नकारते हुऐ साफ शब्‍दो में कहा कि मेरा ऐसी परिशिष्‍ट से क्या लेना देना, पर वह बडे आत्‍मीयता से कहने लगा सर बस क्‍वाटर पेज का लगा रहा हूं जो बत्‍तीस हजार रुपये का ही  हैं, आपके लिऐ कौन सी बडी बात हैं, मैं सुनते ही सकपका गया 32000/... मैने कहा से तो मेरा साल भर का भी बजट नही हैं तो वह बीच का रास्‍ता निकालते हुऐ बास को मैनेज करने की दुहाई देते हूऐ 16000/ सेमी क्‍वाटर पेज की बात करने लगा, चूंकि मैं खाने की टेबल पर था, मैंने कडे शब्‍दो में ना करते हूऐ फोन बंद कर दिया करीब 40 मिनट बाद फिर उसी का फोन आया, सर बास आपसे बात करना चाहते हैं, और मेरे कुछ कहने से पहले ही, सर नमस्‍ते ,बालक कह रहा था आप नाराज हैं कुछ गलती हो गई क्‍या, बताइऐ, मैने कहा यार ऐसा कुछ नही हैं पर न तो मेरा ऐसा कोई व्‍यवसाय है जिसमें विज्ञापन की जरूरत हो और न मेरी रूच

कभी नऐ पाकेट में दे दें तुमको चीज पुरानी....

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पिछले दिनो बाजार से देख समझ कर लेने के बावजूद घर पर पहुचते ही श्रीमति ने अंगूर में खांमीया निकाल दी दरअसल हमने खरीदे तो कैप्‍सूल आकार के थे , पर घर पर प्‍लास्टिक खोलकर देखने पर कुछ तो मनमाफिक थे बाकी छोटे छोटे गंदे सडे दाने, अपनी इस करतूत पर हमें विश्‍वास नही हो रहा था और फल वाले की बाजीगरी गले नही उतर रही थी, हम दूसरे दिन फिर वही पहुंचें और मासूम फल वाले की बाजीगरी के आड में चल रहा बाजार का शातिर कारोबार देखकर दंग रह गऐ दरअसल वह काले रंग की प्‍लास्टिक में पहले ही छोटे गंदे सडे दाने, डाल कर रखता था फिर उसी में हमारी आपकी पंसद के कुछ अंगूर डाल के टिका देता था, इसी तरह ऐ बार हमारे प‍‍रीचित आम वाले ने तमाम आम सजा कर रखने के बाद भी देने से यह कह कर इन्‍कार कर दिया की बापकी लायक नही हैं केमिकल से पकाये गऐ हैं, जबकी चह बेच रहा था, खैर ये तो सच हैं कि व्‍यवसाय पांच्‍ की चीज को छ में बेचना नही रहा अब बाजार अब पांच से पचास करने का नाम हो गया हैं, फिर ये तो धंधा हैं भाई बात, दर्जन भर केले / अण्‍डे घर पर ग्‍यारह हो जाते हैं,किलो का तीन पाव, मूंगफली के पेस्‍ट से काजू बन जाना डोरा की अण्‍डरविय