वायदे और विदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव जीतने के तुरंत बाद जिस ताबडतोड ढंग से विदेश यात्राओं का सिलसिला शुरू किया वह आश्चर्यजनक हैं, आम चुनावो के दौरान जिस चेहरे ने देश में घूम घूम कर ये बताया की पिछले शासक दलो ने साठ पैसठ सालो में देश को लूट लूट कर कंगाल कर दिया, उसी ने सत्ता पर काबिज होते ही उसी कंगाल देश के सरकारी खजाने से महज एक् साल में 20 देशों की राजकीय यात्रा की है। आरटीआई के हवाले से इन महज 16 देशों में भारतीय दूतावासों की ओर से 37.22 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। अभी चार देशों ने जानकारी नहीं हैं, इसमें फ्रांस , जर्मनी, कनाडा, चीन , मंगोलिया और दक्षिण कोरिया की यात्रा में, फ्रांस से राफेल विमान खरीदेने और कनाडा से यूरेनियम पर करार महत्वपूर्ण रहा, पर अभी भी ये कहा जा सकता हैं कि भारत में निवेश लिवा लाने की पुरजोर कोशिश ज्यादा सफल होती नही दिखती ,इधर दे श के लोग अब चुनावी खुमारी ने निकल कर सत्ता परिवर्तन के नफे नुकसान के अंक गणित में लग गऐ हैं, इन दौरो पर शुरूवाती तौर पर जो तर्क दिये गऐ उससे कही चीन,पाकिस्तान और अमेरिका के व्यवहार में कोई सुधार होता नही दिखा, अमेरिका ...