नेता जी का मजगा

पिछले दिनो सुबह सुबह जब आफिस जाने की जल्दबाजी थी तभी पडोस की बुजूर्ग आण्टी ने सडक पार चौक के मेडिकल से ब्लड प्रेशर की दवाई लाकर देने का आग्रह कर दिया , दवाई जरूरी थी और कोई विकल्प भी नही था हम बाईक से निकले तो प्राय खाली रहने वाले चौक पर भी जबरजस्त जाम लगा था भारी पुलिस इंतजाम, एक महिला पुलिस अधिकारी एक हाथ में वाकी टाकी दूसरे हाथ में मोबाईल लऐ मंद मंद मुस्कान के साथ किसी से बतियाते हुऐ सडक के शहनशाह के समान बीच चौक में खडी थी, आस पास कुछ पटिया छाप नेता हाथ में मोगरे की माला लिये खीस निपोरे खडे थे सडक के बीचो बीच एक लम्बी पटाखे की लडी बिछी हुई थी जिसके एक सिरे पर एक माचिस बाज तैनात था ढोल मास्टर नशे में टुन्न ढोल का शोर मचाऐ हुऐ था, स्कूली बसो को भी सडक से किनारे लगा दिया गया था ठूसे पडे बेचारे बच्चे भी छटपटा रहे थे, इस बीच में ही फंसी एम्बूलेंस की लगातार दम तोडती बैटरी भी उसके सायरन को हिचकियो में बदलती प्रतीत हो रही थी, मेरे जैसे सेकडो लोग, डियूटी जाने वालो को गेट बन्द होने व हाजिरी कटने का डर सता रहा था हर तरफ बैचैनी साफ दिख रही थी खडे लोगो की भारी भीड गवाह थी की जाम ल...