
सीता : शूर्पनखा बदायू में शौच के लिऐ गई जुडवां बहनो के रेप के बाद खेत के पेड पर लटकाने कि घटना पर जनाक्रोश में आश्चर्यजनक ठंडक देखने को मिली, मीडिया भी अखिलेश सरकार को इस तरह कोस रहा था जैसे फेल बच्चे के अभिभावक स्कूल प्रशासन को कोसते हैं, जिस तरह दोनो बच्चीया आर्थिक रूप से कमजोर, शहरी हवा से दूर,जीवन की बुनियादी अधिकार से वंचित रहते हुऐ पुरूषसत्ता का शिकार हो गई, निसंदेह वह हमारी समूचे सवा सौ करोड के लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा हैं जब हमारे पास प्रजातांत्रिक सरकार है , पुलिस है , कानून व्यवस्था है , विश्व की सबसे ज्यादा अनुभवी और गौरवशाली सभ्यता है , सबसे बडा और परिपक्व संविधान है , हम हजारो करोड खर्च करके सरकार बनाते हैं और वह इस तरह कि घटना की वजह से निकम्मी और बेकार दिख रही हैं, लोगो की बुनियादी जरूरते मसलन स्वास्थ, शिक्षा, रोजगार सडक शौचालय तक नही दे सकती हैं, राजनैतिक की राजशाही सोच ऐसी की सायकल लेपटाप, सस्ते चावल, मोबाइल बाटकर अपना पालतू वोटर बना रहे हैं, क्या ये हमारे प्रसाशनिक ढिलाई का नमूना नही कि जिस वर्दी को देख कर पुरा गांव ...